सांझी पूजन और उसकी विधि

 

सांझी पूजन और उसकी विधि

सांझी पर्व' मालवा व निमाड़ अंचल का प्रमुख पर्व है,  साँझी,  राजस्‍थान,  गुजरात,  ब्रजप्रदेश,  मालवा,  निमाड़  तथा अन्‍य कई क्षेत्रों में कुवांरी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार है जो भाद्रपद की पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक अर्थात पूरे श्राद्ध पक्ष में सोलह दिनों तक मनाया जाता है। सांझे का त्‍यौहार कुंवारी कन्‍याएं अत्‍यन्‍त उत्‍साह और हर्ष से मनाती हैं। घर के बाहर, दरवाजे पर दीवारों पर कुंवारी गाय का गोबर लेकर लड़कियां विभिन्‍न आकृतियां बनाती हैं। उन्‍हें फूल पत्तों, मालीपन्‍ना सिन्‍दूर आदि से सजाती हैं और संध्‍या समय उनका पूजन करती हैं।


 

 

विसर्जन करते है लोग अंत के पाँच दिनों में हाथी-घोड़े, किला-कोट, गाड़ी आदि की आकृतियाँ बनाई जाती हैं। सोलह दिन के पर्व के अंत में अमावस्या को संझा देवी को विदा किया जाता है।

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