तुलसी विवाह पूजन और उसकी विधि

 

तुलसी विवाह पूजन और उसकी विधि

पद्म पुराण के अनुसार तुलसी विवाह का कार्य एकादशी को करना शुभ होता है। तुलसी विवाह विधि बेहद सरल है और इसे जातक चाहें तो अपने आप भी कर सकते हैं। 


तुलसी विवाह की विधि- तुलसी विवाह संपन्न कराने के लिए एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए और तुलसी जी के साथ विष्णु जी की मूर्ति घर में स्थापित करनी चाहिए। तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति को पीले वस्त्रों से सजाना चाहिए। पीला विष्णु जी की प्रिय रंग है। तुलसी विवाह के लिए तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाना चाहिए। तुलसी जी के पौधे पर चुनरी या ओढ़नी चढ़ानी चाहिए। इसके बाद जिस प्रकार एक विवाह के रिवाज होते हैं उसी तरह तुलसी विवाह की भी रस्में निभानी चाहिए।

 
        द्वादशी के दिन पुन: तुलसी जी और विष्णु जी की पूजा कर और व्रत का पारण करना चाहिए। भोजन के पश्चात तुलसी के स्वत: गलकर या टूटकर गिरे हुए पत्तों को खाना शुभ होता है। इस दिन गन्ना, आंवला और बेर का फल खाने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

नोट: शालिग्राम मूर्ति यानि विष्णु जी की काले पत्थर की मूर्ति मिलना दुर्लभ होता है। इसके ना मिलने पर जातक विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर को भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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