ब्रह्मगौरी पूनम व्रत पूजन और उसकी विधि
यह व्रत पौष माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है| इस दिन जगजननी गौरी का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए| यह स्त्रियों का व्रत पर्व है| गौरी पूजन के प्रभाव से पति -पुत्र चिरंजीवी होते हैं तथा स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है|

व्रत पूजन विधि- इस दिन स्नान नित्य क्रिया आदि करके | घर की सफाई कर ले और गंगा जल से पूरे घर को पवित्र कर दे | देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। मूर्ति में माता पार्वती का आवाहन करें। देवी पार्वती को अपने घर में आसन दें। अब देवी को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। अब देवी पार्वती को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं, पुष्पमाला पहनाएं, इत्र अर्पित करे, तिलक करें, धूप व दीप अर्पित करें। देवी पार्वती को फूल और चावल अर्पित करें।
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