गंगा दसहरा पूजन और उसकी विधि
गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को दशहरा कहते हैं। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। स्कन्दपुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी संवत्सरमुखी मानी गई है इसमें स्नान और दान तो विशेष करके करें। किसी भी नदी पर जाकर अर्घ्य एवं तिलोदक अवश्य करें। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।

इसका सबसे अच्छा योग यदि ज्येष्ठ शुक्ला दशमी के
दिन मंगलवार रहता
हो व हस्त
नक्षत्र युता तिथि
हो यह सब
पापों के हरने
वाली होती है।
वराह पुराण में
लिखा हुआ है
कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी
स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी वह
दस पापों को
नष्ट करती है।
इस कारण उस
तिथि को दशहरा कहते हैं। ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, बुधवार,
हस्त नक्षत्र, गर, आनंद, व्यतिपात, कन्या का चंद्र,
वृषभ के सूर्य इन दस योगों में मनुष्य स्नान करके सब पापों से छूट जाता
है।
इस फल
भविष्य पुराण
में लिखा
हुआ है कि, जो
मनुष्य इस दशहरा के दिन गंगा
के पानी में
खड़ा होकर दस
बार इस स्तोत्र को पढ़ता है
चाहे वो दरिद्र हो, चाहे
असमर्थ हो वह
भी प्रयत्नपूर्वक गंगा की
पूजा कर उस
फल को पाता
है। यह दशहरा के दिन स्नान करने की विधि
पूरी हुई।
पूजन विधि-
इस दिन हो
सके तो व्रत
रहे और गंगा
में स्नान कर
गंगा जी का पूजन करे |पूजन में दीप
– धूप,
फल, फूल आदि
अर्पित करे|
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