बासोडा पूजन और उसकी विधि


 

बासोडा पूजन और उसकी विधि

बसोड़ा का अर्थ है बासी और इस त्योहार को होली पर्व से सात अथवा आठ दिन बाद मनाया जाता है| इसके अलावा जिनके जो रीति-रिवाज है वह बसोड़े वैसे ही मनाते हैं| बसोड़ा मनाने से एक दिन पहले रात में मीठे चावल बनाते हैं और अगले दिन का सारा खाना भी बनाकर रख लेते हैं क्योंकि बसौड़े वाले दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है| परन्तु वर्तमान समय में कई स्थानों पर अब कुछ बदलाव गया है वह यह है कि कुछ लोग केवल बसोड़े की पूजा के लिए एक दिन पहले की रात में मीठे चावल पूजा के लिए बना लेते हैं|

बसोड़े से एक दिन पहले बसोड़े के गीत गाये जाते हैं लेकिन अब कई जगहों पर इसका रिवाज भी लुप्त हो रहा है क्योंकि एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है और शहरों में इन बातों को लोग भूलते जा रहे हैं| एक दिन पहले रात को हाथ में मेहंदी भी लगाई जाती है और अगले दिन की पूजा के लिए मोठ, चना अथवा बाजरा भिगो देते हैं| बसोड़े वाले दिन सभी भिगी चीजों को एक थाली में रख लेते हैं| थोड़ी हल्दी भी साथ ही रख लेते हैं और कुछ स्थानों पर बड़कुल्ला ,यह गोबर के छोटे-छोटे उपलों से बनी माला होती है जिसे होली से पहले बनाते हैं और होली जलाने के लिए उस पर चढ़ा देते हैं उनमें से एक माला बसोड़े पर चढ़ाने के लिए रख लेते हैं,की माला भी रखते हैं और उसे पूजा स्थान पर चढ़ा देते हैं|

सुबह के समय सारा सामान इकठ्ठा कर शीतला माता की पूजा करते हैं| भीगे हुए मोठ, चना और बाजरा चढ़ाते हैं हल्दी का तिलक लगाते हैं और साथ में कुछ दक्षिणा भी चढ़ाते है| मीठे चावल भी यहाँ माता पर चढ़ाए जाते हैं और खाने की कुछ चीजों को सफाई करने वाली को भी देते हैं| सभी अपने-अपने रिवाज के अनुसार बसोड़े की पूजा करते हैं|

बसोड़े वाले दिन सुबह ठंडे पानी से नहाना चहिए और जिन माताओं के बच्चे अभी माता का दूध पीते हो तब उन्हें बसोड़े के दिन नहाना नहीं चाहिए.

 

बसोड़े की कहानी एक बुढ़िया माई थी जो बसोड़े की पूजा करती थी इसलिए वह ठण्डी रोटी खाती थी और शीतला माता की पूजा करती थी| एक दिन गाँव में आग लग गई और बुढ़िया का घर छोड़ सारा गाँव आग में जल गया| गाँव वाले बुढ़िया माई के पास आए और कहने लगे कि सारा गाँव जल गया लेकिन तू बच गई, ये कैसे हुआ? बुढ़िया ने कहा कि मैने बसोड़े की ठंडी रोटी खाई थी और शीतला माता की पूजा की थी इसलिए तुम्हारे घर जल गए और मैं बच गई, तुमने किसी ने बसोड़े की पूजा नहीं की|

अब सारे गाँव में ढिंढोरा पिटवा दिया गया कि सब कोई बसोड़े की पूजा करें और ठंडी रोटी खाए| शीतला माता की पूजा करें| जिस दिन शीतला माता की पूजा करनी हो उससे एक दिन पहले सारा खाना बनाकर रखें| हे शीतला माता ! जैसे बुढ़िया माई की रक्षा की वैसे ही सबकी रक्षा करना| सबके बच्चों की रक्षा करना|

पूजन विधि इस दिन शीतला देवी की पूजा होती है और उनको एक दिन पहले का बना भोजन अर्पित किया जाता है इस दिन के बाद बासी भोजन खाना हर घर में बंद हो जाता है | इस दिन शीतला देवी की पूजा करने से चेचक, ,चरम रोग आदि रोगों से निजात मिलाती है | और इस दिन किसी के घर में चूल्हा जले |

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