महालक्ष्मी व्रत पूजन और उसकी विधि
यह व्रत हिन्दू धर्म में बहुत ही लोग करते है इस व्रत से महालक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है | इस व्रत की कथा अलग –अलग प्रकार से है इस व्रत में माता लक्ष्मी की उपासना की जाती है| पूजन , प्रार्थना हमेशा उत्तर मुख को करनी चाहिए |

महालक्ष्मी
व्रत -पूजन विधि – यह व्रत किसी शुक्रवार से प्रारम्भ कर
सकते है इस व्रत पर सोलह बोल की कहानी सोलह बार कही जाती है और चावल या गेहूँ छोडे
जाते है l आश्विन कृष्णा अष्टमी को
सोलह पकवान पकाये जाते है l ‘सोलह बोल’ की कथा है लकड़ी की चौकी पर श्वेत आसन बिछाए यदि आप मूर्ति का प्रयोग कर रहे हो तो उसे आप लाल वस्त्र से सजाएँ | श्री लक्ष्मी को पंचामृ्त से स्नान कराया जाता है. और फिर उसका सोलह प्रकार से पूजन किया जाता है संभव हो तो एक कलश पर अखंड ज्योति स्थापित करें | सुबह तथा संध्या के समय पूजा आरती करें, मेवा,मिठाई, सफेद दूध की बर्फी का नित्य भोग लगायें | 5 चन्दन सामग्री, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा नाना प्रकार के भोग रखे जाते है सूत 16 की सख्या में 16 बार रखा जाता है | लाल कलावे का टुकड़ा लीजिये तथा उसमे १६ गांठे लगा कर कलाई में बांध लीजिये इस प्रकार प्रथम दिन सुबह पूजा के समय प्रत्येक घर के सदस्य इसे बांधे एवं पूजा के पश्वात इसे उतार कर लक्ष्मी जी के चरणों में रख दें इसका प्रयोग पुनः अंतिम दिन संध्या पूजा के समय होगा | इसके बाद व्रत करने वाले उपवासक को ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है और दान दिया जाता है|
उद्यापन की विधि : व्रत के अंतिम दिन उद्यापन के समय दो सूप लें, किसी कारण से आप को सूप ना मिले तो आप स्टील की नई थाली ले सकते हैं इसमें १६ श्रृंगार के सामान १६ ही की संख्या में और दूसरी थाली अथवा सूप से ढकें , १६ दिए जलाएं , पूजा करें , थाली में रखे सुहाग के सामान को देवी जी को स्पर्श कराएँ एवं उसे दान करने का संकल्प लें |
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सोलह सिंगार हेतु दान सामग्री की 16 वस्तुएं –
सोलह चुनरी, सोलह सिंदूर, सोलह लिपिस्टिक, सोलह रिबन, सोलह कंघा, सोलह शीशा, सोलह बिछिया, नाक की सोलह कील या नथ, सोलह फल, सोलह मिठाई, सोलह मेवा, सोलह लौंग, सोलह इलायची, सोलह मीटर सफेद कपड़ा या सोलह रुमाल दान दे|
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