धूलिका पर्व (चैत्र कृष्ण पक्ष) पूजन और उसकी विधि

 

धूलिका पर्व (चैत्र कृष्ण पक्ष) पूजन और उसकी विधि

चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को धूलि का त्यौहार मनाया जाता है| इसे होलिका दहन के अगले दिन मनाया जाता है| इस दिन होलिका दहन की जो राख होती है उसकी वंदना की जाती है| वैदिक मंत्रों से अभिषिक्त उस राख को लोग मस्तक पर लगाते हुए एक-दूसरे से प्रेम से मिलन करते हैं| दिन की दूसरी बेला में रंग, गुलाल, अबीर, कुमकुम, केसर की बौछार लगाई जाती है|


 

वर्तमान समय में होलिका की राख को लगाने की परंपरा लुप्त हो रही है और सुबह से दोपहर तक रंग, गुलाल तथा पानी एक-दूसरे पर डालने की परंपरा जोर पकड़ रही है|

 

पूजन विधि इस दिन पाप का अंत हुआ था और भक्त प्रहलाद की जीत हुई थी इसलिए होलिका दहन के बाद लोग अगले दिन उस राख को मस्तक पर लगाते है | और फिर एक दूसरे से, शत्रुता को भूल का गले मिलते है | इसके साथ भगवान् विष्णू का पूजन भी करते है | और साथ में भज कीर्तन कर पर्व को आनन्दमयी बनाते है|

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