छोटी बडी सांकली पूजन और उसकी विधि
कार्तिक में बडी़ सांकली व्रत मनाया जाता है| यह व्रत भी पूर्णमासी से आरम्भ होता है| इसमें एक दिन भोजन नहीं किया जाता है| फिर दूसरे दिन भोजन किया जाता है| फिर तीसरे दिन भोजन नहीं करते है | इस प्रकार यह क्रम पूरे माह चलता रहता है| इस व्रत में भी यदि बीच में रविवार या एकादशी आ जाए तब दो दिन तक भोजन नहीं किया जाता है| इस व्रत का उद्यापन भी छोटी सांकली के अनुसार किया जाता है|

सांगली महाराष्ट्र राज्य का एक शहर है। यह पर्व के रूप में बहुत ही विख्यात है | सांगली शहर दक्षिण-पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। सांगली नगर पुणे- बैंगलोर रेलमार्ग पर कोल्हापुर के पूर्व में कृष्णा नदी के किनारे स्थित है।
व्रत व पूजन विधि इस दिन लोग अपनी श्रद्धा अनुसार दीप, धूप, फल, आदि अर्पित कर अपनी मनोकामना से फल पाते है और अगली बार आने के लेई कहते है |
कार्तिक में छोटी सांकली व्रत
पूजा विधि- यह व्रत विधि कार्तिक लगते ही पूर्णमासी से की जाती है| पूर्णिमा के दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए| फिर उसके बाद दो दिन तक भोजन किया जाता है| इसके बाद एक दिन भोजन नहीं करते हैं| इसके बीच में यदि रविवार या एकादशी पडे़ तो दो दिन तक भोजन नहीं करना चाहिए| इस प्रकार एक माह तक यह क्रम चलता रहता है| व्रत पूरे होने के बाद हवन किया जाता है तथा उद्यापन करते हैं| उद्यापन में 33 ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है| एक ब्राह्मण तथा उसकी पत्नी को जोडे़ के रुप में भोजन कराया जाता है| व्यक्ति को अपनी सामर्थ्यानुसार उद्यापन करना चाहिए. यदि उसकी सामर्थ्य 33 ब्राह्मणों को भोजन कराने की नहीं है तब उसे ब्राह्मण तथा ब्राह्मणी को भोजन कराना चाहिए|कार्तिक में बडी़ सांकली व्रत
यह व्रत भी पूर्णमासी से आरम्भ होता है| इसमें एक दिन भोजन नहीं किया जाता है| फिर दूसरे दिन भोजन किया जाता है| फिर तीसरे दिन भोजन नहीं करते हैं| इस प्रकार यह क्रम पूरे माह चलता रहता है| इस व्रत में भी यदि बीच में रविवार या एकादशी आ जाए तब दो दिन तक भोजन नहीं किया जाता है| इस व्रत का उद्यापन भी छोटी सांकली के अनुसार किया जाता है|
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