औसान बीबी की पूजा के फायदे, करने की विधि और उसकी कथा
असान अथवा अवसान बीवी और हिन्दू समाज का व्रत है | असान बीवी की पूजा सारे उत्तर भारत में होती है जिसमें सात सुहागिन महिलायें आमंत्रित की जाती है उन्हे मिठाई, लाई, आदि ससम्मान खिलाकर उनसे थोडा़-थोडा़ प्रसाद पूजा करने वाली महिला अपने कोछे में लेती है। ये पूजा मन्नत पूरी होने पर ही आयोजित की जाती है।

अभी तक जो नतीजे है वह इस प्रकार है की “बीवी” को हिन्दू संस्कृति में “देवी” कहते है और असान बीवी बंगाल में मुस्लिम व हिन्दू समाज में पूजित है इन्हे खतरों व तकलीफ़ों की देवी कहा गया है और इनसे मन्नत मानने से लोगों के कष्ट दूर हो जाते है ऐसी अवधारणा है। बंगाल में इन्हे उद्धार देवी के नाम से भी जाना जाता है और इस में सात महिलाओं को मच्छी – भात खिलाया जाता है और गीत गाये जाते है किन्तू हमारे उत्तर भारत में मिठाई – लाई का प्रचलन है और कहानी सुनाई जाती है। बंगाल की हिन्दू-मुस्लिम आबादी जो एक मिली जुली संस्कृति है में भाषा व शब्दों में अंतर के अतिरिक्त पूजा आदि का प्राविधान मिलता जुलाता है उदाहरण के लिये “बन देवी” को मुस्लिम समाज “बन बीवी” या जंगली पीर के नाम से संबोधित करती है चिकेन पाक्स की हिन्दू देवी को शीतला देवी कहते है तो मुस्लिम समाज में इन्हे झाला बीवी के नाम से जान जाता है चीजे एक है पर शब्द व रिचुअल्स के तरीके अलग हो सकते है।
कुल मिलाकर हमारा भारतीय समाज हमेशा से बाहर से आने वाले लोगों की भाषा, वेशभूषा, धर्म, खान-पान, और उनकी पंरंपराओं को बेहिचक अपनी इच्छा व सुविधा अनुसार ग्रहण करता गया और धीरे -धीरे ये सभी चीजे हमारे समाज का अभिन्न अंग बनती गयी ।
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