बैसाखी पूर्णिमा पूजन और उसकी विधि
हिन्दू मान्यतानुसार पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को सबसे प्रिय होती है। पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करना और दान देना बेहद शुभ माना जाता है। वैशाख, कार्तिक और माघ की पूर्णिमा को तीर्थ स्नान और दान-पुण्य दोनों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

पूर्णिमा का महत्व और उपाय- हिन्दू पंचांग के अनुसार हर माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। हिंदू माह के 15 वें दिवस शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं इस दिन चन्द्रमा अपने पूरे आकार में नज़र आता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में बहुत ही महत्व हैं। सामान्यता हर माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अथवा व्रत अवश्य ही मनाया जाता हैं।
हिदु धर्म शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा माँ लक्ष्मी को
विशेष प्रिय है
। इस दिन
माँ लक्ष्मी की
आराधना करने से
जातक को जीवन में किसी
भी चीज़
की कमी नहीं
रहती है ।
शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा के
दिन सुबह लगभग
10 बजे पीपल के
वृक्ष पर मां
लक्ष्मी का आगमन
होता है। कहते
है कि जो
व्यक्ति इस दिन
सुबह उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पीपल के
पेड़ पर कुछ
मीठा रखकर मीठा
जल अर्पण करके
धूप अगरबत्ती जला
कर मां लक्ष्मी का पूजन करें
और माता लक्ष्मी को अपने घर
पर निवास करने
के लिए आमंत्रित करें तो उस
जातक पर लक्ष्मी की कृपा सदा
बनी रहती है।
प्रत्येक पूर्णिमा के दिन किसी शिव मंदिर में सवा किलो अखण्डित चावल ( बासमती चावल ) लेकर जाएँ फिर भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करके अपने दोनों हाथो को मिलाकर उसमें जितना चावल आ सके उतना लेकर शिवलिंग पर चढ़ा दें और बाकी चावल दक्षिणा सहित वही मंदिर में पुजारी या जरूरतमंद को दान में दे दें । इस उपाय को हर पूर्णिमा , सावन के सभी सोमवार को करने से भगवान भोलेशंकर की कृपा मिलती है , समस्त आर्थिक संकट / अड़चने दूर होते है, कार्य क्षेत्र में श्रेष्ठ सफलता मिलती है।
पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बेलपत्र, शमीपत्र और फल चढ़ाने से भगवान शिव की जातक पर सदैव कृपा बनी रहती है । पूर्णिमा के दिन घिसे हुए सफ़ेद चंदन में केसर मिलाकर भगवान शंकर को अर्पित करने से घर से कलह और अशांति दूर होती है। प्रत्येक पूर्णिमा पर सुबह के समय घर के मुख्य दरवाज़े पर आम के ताजे पत्तों से बनाया हुआ तोरण अवश्य ही बांधें, इससे भी घर में शुभता का वातावरण बनता है । लम्बे और प्रेम से भरे दाम्पत्य जीवन के लिए पूर्णिमा और अमावस्या को जातक को शारीरिक सम्बन्ध बिलकुल भी नहीं बनाना चाहिए । प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रमा के उदय होने के बाद साबूदाने की खीर मिश्री डालकर ,बनाकर माँ लक्ष्मी को उसका भोग लगाएं फिर उसे प्रशाद के रूप में वितरित करे, धन आगमन का मार्ग बनेगा। पूर्णिमा के दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन जुए, शराब आदि नशे और क्रोध एवं हिंसा से भी दूर रहना चाहिए।इस दिन बड़े बुजुर्ग अथवा किसी भी स्त्री से भूलकर भी अपशब्द ना बोलें ।
व्रत विधि- भविष्यपुराण के अनुसार पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर स्नान करना चाहिए। अगर
ऐसा संभव ना
हो तो शुद्ध जल में गंगा
जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इस
दिन पितरोंक का
तर्पण करना शुभ
माना जाता है।
हर पूर्णिमा पर सुबह के
समय हल्दी में
थोडा पानी डालकर उससे घर के
मुख्य दरवाज़े / प्रवेश द्वार पर
ॐ बनायें.।
पूर्णिमा तिथि प्रात: व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके
बाद पूरे विधि-विधान से चन्द्रमा की पूजा करनी
चाहिए। इसके बाद
रात्रि में मौन
होकर खाना खाना
चाहिए। प्रत्येक मास
की पूर्णिमा को
इसी प्रकार चन्द्रमा की पूजा करनी
चाहिए। इससे व्यक्ति को सभी सुखों की प्राप्ति होती
है।
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