गोगापंचमी पूजन और उसकी विधि

 

गोगापंचमी पूजन और उसकी विधि

श्रावन मास के बाद भाद्रपद मास आता है, इस मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को गोगा पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है, इस दिन गोगादेव की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि गोगादेव सर्पदंश से जीवन की रक्षा करते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा भी की जाती है। इससे जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार चार दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी को मनाया जाता है, जो गोगा नवमी के नाम से प्रसिद्ध है। 


 

पूजन विधि-गोगा पंचमी के दिन गोगादेव के साथ ही नाग पर भी दूध चढ़ाया जाता है। गोगादेव की पूजा के लिए साफ दीवार को गेरू से पोतकर दूध में कोयला मिलाकर चौकोर चौक बनाकर उसके अन्दर पांच सर्प बनाने चाहिए। इसके बाद इन सर्पों पर जल, कच्चा दूध, रोली, चावल, बाजरा, आटा, घी, चीनी मिलाकर चढ़ाना चाहिए और पंडित को दक्षिणा देनी चाहिए। 

यह भी मान्यता है कि गोगा देव बच्चों के जीवन की रक्षा करते हैं। इसलिए विवाहित स्त्रियां अपनी संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए गोगादेव की पूजा करती है। इसके साथ ही इस पूजा से विवाहित स्त्रियां सौभाग्यवती होती है और नि:संतान स्त्री की संतान प्राप्त होती है।

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