पुरुषोत्तम मास (मल मास) के फायदे, करने की विधि

 

पुरुषोत्तम मास  (मल मास) के  फायदे, करने की विधि

कथा- इस मास को अधिक मास भी कहते है पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा है।, स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को 'मलमास' कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया। 


 

भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुचे। वहां श्रीकृष्ण विराजमान थे। करुणासिंधु भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया- अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।   इसीलिए प्रति तीसरे वर्ष (संवत्सर) में तुम्हारे आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ कुछ अच्छे कार्य करेगा, उसे कई गुना पुण्य मिलेगा। इस प्रकार भगवान ने अनुपयोगी हो चुके अधिकमास को धर्म और कर्म के  लिए उपयोगी बना दिया। अत: इस दुर्लभ पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान एवं दान करने वाले को कई पुण्य फल की प्राति होगी।  

यह कब होता है ,सौर-वर्ष का मान 365 दिन, 15 घड़ी, 22 पल और 75 विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष 354 दिन, 22 घड़ी, 1 पल और 23 विपल का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष 10 दिन, 53 घटी, 21 पल (अर्थात लगभग 11 दिन) का अन्तर पड़ता है। इस अन्तर में समानता लाने के लिए चांद्रवर्ष 12 मासों के स्थान पर 13 मास का हो जाता है।

वास्तव में यह स्थिति स्वयं ही उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि जिस चंद्रमास में सूर्य-संक्रांति नहीं पड़ती, उसी को "अधिक मास" की संज्ञा दे दी जाती है तथा जिस चंद्रमास में दो सूर्य संक्रांति का समावेश हो जाय, वह "क्षयमास" कहलाता है। क्षयमास केवल कार्तिक, मार्ग  पौस मासों में होता है। जिस वर्ष क्षय-मास पड़ता है, उसी वर्ष अधि-मास भी अवश्य पड़ता है परन्तु यह स्थिति १९ वर्षों या १४१ वर्षों के पश्चात् आती है। जैसे विक्रमी संवत २०२० एवं २०३९ में क्षयमासों का आगमन हुआ तथा भविष्य में संवत २०५८, २१५० में पड़ने की संभावना है।

पूजन विधि- मल मास में व्रत रहना चाहिए और व्रत रहने वालो को सात्विक भोजन करना चाहिए, और जमीन पर सोना चाहिए दान करना चाहिए,इस मास में दान, धर्म ,पूजा, स्नान जरूर करना चाहिए| पूजन श्री लक्ष्मी विष्णू जी का करे इसमें पाठ, हवन दान करे| इसमें पितर कार्य, शुभ कार्य मंगल कार्य नहीं किये जाने चाहिए|  

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राष्ट्रीय युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस 12 जनवरी

  राष्ट्रीय युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस प्रत्तेक वर्ष 12 जनवरी को भारत में पूरे उत्साह और खुशी के स...