मकर संक्रांती
मकर संक्रांती का त्यौहार लोहड़ी के दूसरे दिन मनाया जाता है| यह
पर्व वर्ष के जनवरी माह की १४ दिनाँक को मनाया जाता है| तमिलनाडु में इसे पोंगल भी कहते हैं।

एक प्रचलित लोककथा है कि मकर संक्रान्ति के दिन कंस ने कृष्ण को
मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था, जिसे कृष्ण ने खेल–खेल में
ही मार डाला था। उसी घटना को लेकर लोहिता का पावन पर्व मनाया जाता है। सिन्धी समाज
में भी मकर संक्रान्ति से एक दिन पूर्व ‘लाल
लाही’ के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है।
सूर्य देव के उत्तरायण होने पर पूरे देश में मकर संक्रांति
का पर्व मनाया जाता है। इस दिन
सूर्य भगवान की विशेष पूजा की जाती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के नाम से मनाया
जाता है| हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति एक अनमोल अवसर है हम सब के लिए अपने जीवन से संघर्ष, अस्थिरता, दुख को दूर कर सुख और
समृद्धि प्राप्त करने का इस पावन मौके पर अपनी सामर्थ के अनुसार दान करना चाहिए
और सूर्य देव का पूजन अवश्य करना चाहिए |
मकर संक्रांति में दान के लिए तिल के
लड्डू, तिल से बनी मिठाई, फल, चावल-दाल, कच्ची खिचड़ी, घी, गर्म कपड़ों
का दान सुपात्र ब्राह्मण ओर गरीबों को करते है , मकर
संक्रांति के दिन किया गया दान विशेष फलदायी माना जाता है|
बहुत से लोग मनोकामना पूर्ति के लिए मकर
संक्रांति के दिन स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देते है, जल में कुमकुम, चावल, तिल और लाल
रंग के फूल मिलाकर अर्ध्य देते है, और सूर्य देव के किसी मूल मंत्र का जाप करते
है|
बहुत से लोग पितरों की शांति के लिए मकर
संक्रांति के दिन जल में तिल मिलाकर तर्पण करते है, अपने
पितरो को याद करते है, और तिल से बनी चीजों का दान करते है, और आशीर्वाद प्रदान करने
की प्राथना करते है, व ईश्र्वर से प्राथना करते है की हमारे पितरो को मुक्ती
प्रदान करे|
सूर्य का स्थान परिवर्तन ज्योतिषशास्त्र
के अनुसार जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस समय मंकर
संक्रांति मनाई जाती है|
तीर्थ
स्थलों पर मकर संक्रांति की रौनक बहुत ही बढ़ जाती है, मकर
संक्रांति से शुभ दिन शुरू होते हैं इस दिन दान, जप, तर्पण, श्राद्ध का
बहुत महत्व है. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान हजार गुना
पुण्य प्रदान करता है|
मकर संक्रांति में स्नान का महत्व पुण्यकाल
में किसी तीर्थ स्थान या नदी में स्नान करने लोग जाते है | जो लोग तीर्थ स्थान पर
जा नहीं पाते है वो अपने घर में ही तिल का
उबटन लगाकर या जल में तिल मिला कर स्नान कर लेते है | ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने
से रोग दूर होते हैं और स्वास्थ्य अच्छा रहता है|
उत्तर प्रदेश में यह एक अनोखा त्यौहार है यहाँ लोग आपने घरो में चावल की
खिचडी व चावल की तहडी बनाते है, और अपने उच्च रिश्तेदार को या मान्यता प्राप्त
लोगो को बुलाकर बहुत ही प्रेम भाव से बैठाकर घर में बने भोजन को खिलाते है और उसके
साथ दान भी देते है| यह परम्परा बहुत ही पुराने समय से चली आ रही है| इस में बहुत
से लोग अपने उच्च रिश्तेदार जैसे बुआ-फूफा, बेटी-दामाद, आदि को मकर संक्रांती के
दिन का निमंत्रण देकर उनकी सेवा कर अपने जीवन को धन्य बनाते है|
मकर संक्रांती का त्यौहार भारत में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है| इस दिन सूर्य भगवान की विशेष पूजा कर अपने जीवन को धन्य
बनाते है, तमिलनाडु में इसे पोंगल के नाम से बहुत ही हार्स उल्लास के साथ मनाया
जाता है|
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