विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस- 15 मार्च

 

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस- 15 मार्च

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 15 मार्च 2020 को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया गया| भारत में यह दिवस पहली बार वर्ष 2000 में मनाया गया। और आगे भी प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।



इस अवसर पर उपभोक्ताओं को उनके कन्ज्यूमर राइट्स अथवा उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं| इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य ग्राहकों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाना और उन्हें जागरुक बनाना है|

इसके बाद इसअधिनियम में 1991 तथा 1993 में संशोधन किये गए। उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम को अधिकाधिक कार्यरत और प्रयोजनपूर्ण बनाने के लिए दिसम्‍बर 2002 में एक व्‍यापक संशोधन लाया गया और 15 मार्च 2003 से लागू किया गया। परिणामस्‍वरूप उपभोक्‍ता संरक्षण नियम, 1987 में भी संशोधन किया गया और 5 मार्च 2004 को अधिसूचित किया गया था। भारत सरकार ने 24 दिसम्बर को राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता दिवस घोषित किया है, क्योंकि भारत के राष्‍ट्रपति ने उसी दिन ऐतिहासिक उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधिनियम को स्वीकारा था। इसके अतिरिक्‍त परिचय

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस दुनिया भर के देशों द्वारा मानवाधिकारों पर सम्मेलन आयोजित करके और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न तरीकों पर चर्चा आयोजित करके मनाया जाता है| अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अलावा भारत में 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है|

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस- 8 मार्च

 

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस- 8 मार्च

            अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रत्येक वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।



            कुछ क्षेत्रों में, यह दिवस अपना राजनीतिक मूलस्वरूप खो चूका है, और अब यह मात्र महिलाओं के प्रति अपने प्यार को अभिव्यक्त करने हेतु एक तरह से मातृ दिवस और वेलेंटाइन डे की ही तरह बस एक अवसर बन कर रह गया हैं। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा चयनित राजनीतिक और मानव अधिकार विषयवस्तु के साथ महिलाओं के राजनीतिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए अभी भी इसे बड़े जोर-शोर से मनाया जाता हैं। कुछ लोग बैंगनी रंग के रिबन पहनकर इस दिन का जश्न मनाते हैं।

            सबसे पहला दिवस, न्यूयॉर्क शहर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया, और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है।

            अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर, यह दिवस सबसे पहले २८ फ़रवरी १९०९ को मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। १९१० में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था।

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