प्रवासी (अनिवासी) भारतीय दिवस
प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आये थे। इस दिवस को मनाने की शुरुवात सन 2003 से हुई थी। प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी के दिमाग की उपज थी।
भारत में विदेशियों के आने का सिलसिला आर्यों से शुरू हुआ जो मध्य एशिया ये यहां आए थे तथा यह सिलसिला अंग्रेजों के समय तक चलता रहा जिन्होंने हमारे पहले अनिवासी भारतीय - मोहनदास करमचंद गांधी के नेतृत्व में महान स्वतंत्रता संघर्ष के कारण भारत छोड़ा।
जो भारतीय सबसे पहले विदेश गए वे सम्राट अशोक के दूत थे जो ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रसार करने के लिए गए थे। इसके बाद चोल वंश ने अपनी शाखाओं को सुदूर पूर्व में फैलाया। ऐसा कहा जाता है कि भारत के व्यापारियों ने अपने खुद के पोतों का निमार्ण किया था तथा वे कारोबार की तलाश में रोम एवं चीन तक जा पहुंचे थे। 19वीं शताब्दी के दौरान तथा भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति तक, भारत के लोग करारनामा प्रणाली के अंतर्गत अंग्रेजों के अन्य उपनिवेशों - मॉरीशस, गुयाना, कैरेबियन, फिजी एवं पूर्वी अफ्रीका में गए। इसी अवधि में गुजराती एवं सिंधी सौदागर अडेन, ओमान, बहरीन, दुबई, दक्षिण अफ्रीका एवं पूर्वी अफ्रीका, जिसमें से अधिकांश पर अंग्रेजों का शासन था, में जा कर बस गए।
इस अवसर पर प्रायः तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले भारतवंशियों का सम्मान किया जाता है तथा उन्हे प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किया जाता है। यह आयोजन भारतवंशियों से सम्बन्धित विषयों और उनकी समस्यायों के चर्चा का मंच भी है।
उद्देश्य-
1. अप्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति सोच, उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति के साथ ही उनकी अपने देशवासियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध कराना।
2. भारतवासियों को अप्रवासी बंधुओं की उपलब्धियों के बारे में बताना तथा अप्रवासियों को देशवासियों की उनसे अपेक्षाओं से अवगत कराना।
3. विश्व के 110 देशों में अप्रवासी भारतीयों का एक नेटवर्क बनाना।
4. भारत का दूसरे देशों से बनने वाले मधुर संबंध में अप्रवासियों की भूमिका के बारे में आम लोगों को बताना।
5. भारत की युवा पीढ़ी को अप्रवासी भाईयों से जोड़ना।
6. भारतीय श्रमजीवियों को विदेश में किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना होता है, के बारे में विचार-विमर्श करना।
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